भाई-बहन शायरी
भाई-बहन के रिश्ते पर शायरी — बचपन की लड़ाइयाँ, राखी का धागा, उम्र भर का साथ।
Banale Editorialअपडेट:
जितनी छेड़छाड़ और जितना प्यार भाई-बहन के रिश्ते में एक साथ रहता है, उतना किसी और रिश्ते में नहीं। यह वह दोस्त है जिसे आपने चुना नहीं, बचपन की हर टॉफ़ी का हिस्सेदार, और दुनिया से लड़ाई हो तो सबसे पहले पीठ पीछे खड़ा होने वाला। रक्षाबंधन पर यह एहसास त्योहार बन जाता है — पर राखी के साथ भेजा गया शेर, या बचपन की तस्वीर के नीचे लिखी पंक्ति, साल के किसी भी दिन काम आती है।
नीचे की शायरी इसी पूरे रंग के लिए लिखी गई हैं: वे लड़ाइयाँ जो सबसे अच्छी यादें बन गईं, वह बहन जो गवाह भी है और वकील भी, वह भाई जिसकी कमी हर त्योहार पर खलती है।
लड़ते-झगड़ते बड़े हुए हैं हम, पर दुनिया से लड़ना पड़े तो साथ खड़े हैं हम।
Ladte-jhagadte bade hue hain hum, Par duniya se ladna pade to saath khade hain hum.
राखी का धागा कच्चा ही सही, इससे मज़बूत कोई ज़ंजीर नहीं बनी।
Raakhi ka dhaaga kachcha hi sahi, Isse mazboot koi zanjeer nahin bani.
बहन वो पहली दोस्त है जो घर में मिली, माँ के बाद सबसे सच्ची दुआ वही है।
Behen wo pehli dost hai jo ghar mein mili, Maa ke baad sabse sachchi dua wahi hai.
भाई का डाँटना भी हिफ़ाज़त है, ये बात समझने में बरसों लगते हैं।
Bhai ka daantna bhi hifaazat hai, Ye baat samajhne mein barson lagte hain.
मेरी हर शरारत की गवाह है वो, और हर मुश्किल में वकील भी वही।
Meri har shararat ki gawah hai wo, Aur har mushkil mein vakeel bhi wahi.
टॉफ़ी के बँटवारे से शुरू हुआ रिश्ता, अब दुखों का बँटवारा भी कर लेता है।
Toffee ke bantware se shuru hua rishta, Ab dukhon ka bantwara bhi kar leta hai.
दूर शहरों में बस गए तो क्या हुआ, त्योहार अब भी तेरे नाम से शुरू होते हैं।
Door shahron mein bas gaye to kya hua, Tyohaar ab bhi tere naam se shuru hote hain.
भाई हो तो छत की तरह धूप से बचाए, बहन हो तो आँगन जैसी घर महकाए।
Bhai ho to chhat ki tarah dhoop se bachaaye, Behen ho to aangan jaisi ghar mehkaaye.
लड़ाई में जो चीज़ें फेंक के मारी थीं, आज वही यादें सबसे क़ीमती हैं।
Ladaai mein jo cheezein phenk ke maari thin, Aaj wahi yaadein sabse qeemti hain.
मायके की याद हो या राखी का दिन, बहन के लिए भाई पूरा बचपन होता है।
Maayke ki yaad ho ya raakhi ka din, Behen ke liye bhai poora bachpan hota hai.
रिश्तों की भीड़ में एक रिश्ता ऐसा, जो रूठे भी तो मनाना फ़र्ज़ लगता है।
Rishton ki bheed mein ek rishta aisa, Jo roothe bhi to manaana farz lagta hai.
उम्र भर का साथ लिखा है हमारा, हर जनम में यही घर मिले, यही तुम।
Umr bhar ka saath likha hai hamara, Har janam mein yahi ghar mile, yahi tum.
रिमोट की जंग में कोई नहीं जीता, पर वो झगड़े अब चैनलों से प्यारे हैं।
Remote ki jang mein koi nahin jeeta, Par wo jhagde ab channelon se pyaare hain.
मम्मी-पापा से छुपाए सारे राज़, हमारी सरकार में सिर्फ़ हम दो थे।
Mummy-papa se chhupaaye saare raaz, Hamaari sarkaar mein sirf hum do the.
ख़ुद तो सौ ताने देगी मुझे, पर मेरी शिकायत किसी से बर्दाश्त नहीं।
Khud to sau taane degi mujhe, Par meri shikaayat kisi se bardaasht nahin.
प्लेट का आख़िरी गुलाब जामुन, आज भी तेरा हक़ मान लेता हूँ।
Plate ka aakhri gulab jamun, Aaj bhi tera haq maan leta hoon.
उधार जो लिए थे बचपन की पॉकेट मनी से, वो क़र्ज़ नहीं, यादों की जमा-पूँजी है।
Udhaar jo liye the bachpan ki pocket money se, Wo qarz nahin, yaadon ki jama-poonji hai.
बड़ी बहन आधी माँ होती है, डाँट में भी परवाह घुली रहती है।
Badi behen aadhi maa hoti hai, Daant mein bhi parwaah ghuli rehti hai.
कल तक कंधे तक आता था जो, आज उसी के कंधे पे घर का भरोसा है।
Kal tak kandhe tak aata tha jo, Aaj usi ke kandhe pe ghar ka bharosa hai.
मेरी अलमारी से कपड़े ग़ायब हैं, और पहन के वही मुझसे पूछती है — कैसी लग रही हूँ?
Meri almaari se kapde gaayab hain, Aur pehen ke wahi mujhse poochhti hai — kaisi lag rahi hoon?
राखी पर और उसके बाद — इनका इस्तेमाल
रक्षाबंधन तो ज़ाहिर मौक़ा है: राखी के साथ जाने वाले कार्ड पर एक शेर लिखिए, या इस साल घर न पहुँच पाएँ तो सुबह-सुबह भेज दीजिए — धागे और त्योहारों वाली शायरी इसी दूरी के लिए लिखी गई हैं। जन्मदिन और बिदाई दूसरे बड़े मौक़े हैं, और बचपन की तस्वीर का कैप्शन तो रोज़ का बहाना है।
भाई-बहन की शायरी की असली चाल यह है कि एक पैर हमेशा छेड़छाड़ में रहे। जो पंक्ति सिर्फ़ श्रद्धा से भरी हो, वह पराए भाई-बहन की लगती है; यहाँ की लड़ाई और टॉफ़ी वाली शायरी इसीलिए सच्ची लगती हैं कि पहले शरारत क़बूल करती हैं, प्यार बाद में। वह चुनिए जो आप दोनों जैसी लगे, और अपनी एक अंदरूनी बात जोड़ दीजिए।
पाठकों के सवाल
- राखी के कार्ड पर क्या लिखूँ?
- एक शेर और एक निजी पंक्ति — इतना काफ़ी है। धागे या साथ खड़े होने वाली शायरी चुनिए (इस संग्रह की पहली दो कार्ड के लिए ही लिखी गई हैं), फिर एक ऐसा वाक़्य जोड़िए जो सिर्फ़ आप दोनों समझें — बचपन का नाम या कोई पुराना मज़ाक़। शेर वज़न देता है; निजी पंक्ति उसे आपका बनाती है।
- क्या बहन भी ये भाई को भेज सकती है, या ये सिर्फ़ भाई की तरफ़ से हैं?
- दोनों तरफ़ से। कुछ शायरी बहन की ज़ुबान में हैं, कुछ भाई की, और ज़्यादातर दोनों तरफ़ से चलती हैं — लड़ाइयाँ, टॉफ़ी का बँटवारा और "दुनिया से लड़ना" दोनों के साझे हैं। भेजने से पहले अंग्रेज़ी अर्थ पढ़कर देख लीजिए कि शेर किसकी ज़ुबान में है।
- क्या ये शायरी मौलिक हैं?
- हाँ — हर शायरी इसी संग्रह के लिए लिखी गई है। राखी के मौसम में हर साल वही घूमे हुए फ़ॉरवर्ड आते हैं; इस पन्ने का मक़सद ही यह है कि आपके भाई या बहन को वह पंक्ति मिले जो तीन और लोगों से पहले न आ चुकी हो।
अपने लिए एक शायरी चाहिए?
मूड और भाषा चुनिए और कुछ ही सेकंड में मौलिक शायरी और शेयर करने लायक कार्ड पाइए।
अपनी शायरी बनाएँ