दर्द भरी शायरी
भारी दिनों के लिए शायरी — उदासी, पर हमेशा उम्मीद के एक धागे के साथ।
कुछ एहसास कहने से ज़्यादा आसान पढ़ने में होते हैं। दर्द भरी शायरी हमेशा से भारत का वह तरीका रही है जिससे हम टूटे दिल और दूरी को नाम देते हैं — और नाम देकर उसे थोड़ा हल्का कर लेते हैं। यहाँ की पंक्तियाँ इस टीस को ईमानदारी से छूती हैं, पर निराशा तक नहीं जातीं: हर एक में सुबह की ओर एक छोटी-सी खिड़की खुली रहती है।
ये मूल पंक्तियाँ “मैं समझता हूँ” कहने के लिए हैं। हर शायरी देवनागरी, रोमन और अंग्रेज़ी अर्थ के साथ है। अगर आप सच में मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं, तो किसी अपने से ज़रूर बात कीजिए।
आँसू भी अब बहना भूल गए हैं, शायद ज़ख़्म पुराने हो चले हैं।
Aansu bhi ab behna bhool gaye hain, Shayad zakhm puraane ho chale hain.
मुस्कुराना तो सीख लिया हमने, दर्द छुपाना अब आदत हो गई है।
Muskurana to seekh liya humne, Dard chhupana ab aadat ho gayi hai.
जिनके लिए दुनिया छोड़ दी थी हमने, वो हमें भीड़ में अकेला छोड़ गए।
Jinke liye duniya chhod di thi humne, Wo humein bheed mein akela chhod gaye.
टूट कर भी सँभल जाना सीख लिया, हर रात के बाद सुबह आती है।
Toot kar bhi sambhal jaana seekh liya, Har raat ke baad subah aati hai.
कुछ रिश्ते नाम के रह जाते हैं, दिल में रहकर भी दूर हो जाते हैं।
Kuchh rishte naam ke reh jaate hain, Dil mein rehkar bhi door ho jaate hain.
वक़्त ने ऐसा सबक पढ़ाया है, हर अपने में एक पराया पाया है।
Waqt ne aisa sabak padhaaya hai, Har apne mein ek paraaya paaya hai.
गिरना भी ज़रूरी है सँभलने के लिए, रात है तो ही सुबह का इंतज़ार है।
Girna bhi zaroori hai sambhalne ke liye, Raat hai to hi subah ka intezaar hai.
दिल टूटा है, हौसला नहीं टूटा, ये दौर भी गुज़र जाएगा, यक़ीन रख।
Dil toota hai, hausla nahin toota, Ye daur bhi guzar jaayega, yaqeen rakh.
हँसते चेहरे के पीछे भी ग़म होता है, हर कोई अपनी जंग ख़ुद लड़ता है।
Hanste chehre ke peechhe bhi gham hota hai, Har koi apni jang khud ladta hai.
जिसे अपना समझा, वो भी पराया निकला, वक़्त ही था जो आख़िर तक साथ चला।
Jise apna samjha, wo bhi paraaya nikla, Waqt hi tha jo aakhir tak saath chala.
टूटे दिल को सँभलने में वक़्त लगता है, पर हर ज़ख़्म आख़िर भर ही जाता है।
Toote dil ko sambhalne mein waqt lagta hai, Par har zakhm aakhir bhar hi jaata hai.
आँखें नम हैं, पर हौसला बुलंद है, ये रात भी ढलेगी, सुबह नज़दीक है।
Aankhein nam hain, par hausla buland hai, Ye raat bhi dhalegi, subah nazdeek hai.
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